सहसंपादक - आसिफ़ अंसारी
ज़िला संवाददाता - अनिकेत सिंह
दोपहर बाद मलूकपुर लाल मस्जिद स्थित हाजी अज़हर बेग के निवास से दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रजा कादरी(अहसन मियां) की सरपरस्ती में जुलूस-ए-परचम रवाना हुआ जो अपने कदीमी रास्ते मलूकपुर से शुरू होकर दरगाह आला हजरत सलामी देने के बाद बिहारीपुर ढाल,खलील तिराहा,नावेल्टी चौराहा,आज़म नगर के रास्ते श्यामगंज होता हुआ दरगाह शाहदाना वली पर पहुंचा। इससे पहले मलूकपुर पर महफ़िल का आगाज़ तिलावते कुरान से किया गया। हाजी गुलाम सुब्हानी व चंदा मियां ने मिलाद ए पाक पढ़ी। यहां दरगाह शाहदाना वली के मुतावल्ली अब्दुल वाजिद खान नूरी ने कहा कि सरकार शाहदाना वली का दर कौमी एकता का प्रतीक है यहां से मुसलमान ही नही बल्कि हिन्दू भाई भी फैज़ हासिल कर रहे है। सूफी खानकाही बुजुर्गों ने हमेशा अमन का पैगाम दिया। जुलूस आयोजक हाजी अज़हर बेग ने दरगाह आला हज़रत के सज्जादनशीन मुफ्ती अहसन मियां,दरगाह शाहदाना वली के मुतावल्ली अब्दुल वाजिद खान नूरी,दरगाह
रात 10 बजे नातिया मुशायरा शुरू हुआ। जिसकी सदारत सूफी रिज़वान रजा खा साहब ने की। शायर असरार नसीमी में पढ़ा *जो किस्मत से दरे सरकार का दरबान हो,वो रुतबे में शहिनशाहों का सुल्तान होता है।* अमन तिलियापुरी ने पढ़ा *तुम्हारी जालियां चूमे उन्हें आखों से मस कर ले, हर इक मोमिन के दिल में एक अरमान होता है।* दुलारे फारूकी ने ये कलाम पेश किया *वहां जन्नत के फूलों की सी आयेगी महक तुमको,जहा दाना वली का गुलदान हो।* शायर बिलाल राज़,नज़र बरेलवी,सलमान आरिफ, हयात बरेलवी, रईस विधौलवी, शराफत शेरी,मोहम्मद अली अल्वी, अतहर बरेलवी ने भी कलाम पेश किए।


