गंगा में उफान: बदायूं में बाढ़ से बिगड़ते जा रहे हालात, गांव और घरों में भरा पानी; मुश्किल में जिंदगानी

बदायूं संवाददाता - शैलेश गुप्ता

 गंगा में बैराजों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में गंगा नदी किनारे उसहैत क्षेत्र में बसे गांवों में पानी भर गया है। सहसवान क्षेत्र के गांव खागी नगला, तौफी नगला, वीर सहाय नगला के हालात खराब हैं। वहीं कादरचौक क्षेत्र में आधा दर्जन गांवों में भी पानी भर गया है। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों की झोपड़ियों में भरा पानी - फोटो : हिन्दुस्तान टाइम्स टुडे

बदायूं के उसहैत क्षेत्र में गंगा की तलहटी में बसे गांव बहेटी, जटा, कमले नगला, बछौरा के हालात बाढ़ ने बेहद खराब कर दिए हैं। बछौरा में बाढ़ का पानी लगातार कटान कर रहा है तो जटा गांव में पानी भर गया है। बहेटी गांव में मंगलवार की अपेक्षा पानी ज्यादा भरने पर कुछ और लोगों ने अपने मकान तोड़ने शुरू कर दिए। ऐसे में पानी के बीच में ही लोग दिन और रात काट रहे हैं, वहीं सोना उनकी मजबूरी बन गया है।

गंगा के उफान पर होने पर उसहैत क्षेत्र के गांवों में ज्यादा असर दिखाई दे रहा है। यहां के जटा, प्रेमीनगला, सिठौली खाम, जसंवत नगला, जटा, बछौरा, कमले नगला समेत एक दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित है। इसमें सबसे ज्यादा खराब हालात जटा, बछौरा, कमले नगला और बहेटी के हैं।

बहेटी में लोगों ने तोड़े मकान 
बहेटी के अरब सिंह, फूल सिंह, जितेंद्र, रामवीर, राम, मेघनाद, देव सिंह, प्रमोद, सुखवीर, अमरपाल समेत अन्य लोग अपने मकान तोड़ने में लग गए। इधर जटा के लोग अब भी गांव में रह रहे हैं और वहीं पर ऊंचे स्थान, तख्त, ट्रॉली आदि में बैठकर खाना बनाते हैं। कई लोग बीमार भी हो चले हैं, लेकिन वे गांव खाली नहीं कर रहे हैं।

 

उनका कहना कि प्रशासन की टीम गांव नहीं आ रही है और वे ऐसे ही परेशानियों के बीच दिनचर्या बिताने को मजबूर हैं। इधर, प्रभावित कई गांवों में चार-पांच दिनों से बिजली भी नहीं आ रही है, जिससे ग्रामीण रात में परेशान हो रहे हैं। दिन तो जैसे-तैसे कट जाता है लेकिन रात में मुश्किल होती है। जैसे-तैसे मोमबत्ती जलाकर या सोलर पैनल के माध्यम से जल रही लाइटों के सहारे रात गुजारी जा रही है।

ग्रामीण बोले- कोई अधिकारी नहीं आ रहा झांकने
जटा गांव के कमरुद्दीन ने बताया कि जब बाढ़ नहीं आयी थी तब डीएम समेत अन्य अधिकारी गांव के चक्कर लगा गए थे, लेकिन जब से बाढ़ आई है, तब से कोई भी अधिकारी गांव नहीं आया है। गांव की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन अधिकारियों से इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

जटा गांव के इसरार ने बताया कि गांव में कई दिनों से बिजली नहीं आ रही है। ऐसे में रात के समय काफी परेशानी हो रही है, पर कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अधिकारी कह तो रहे हैं,कि ग्रामीणों को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, पर वे गांव आएं तभी तो हकीकत पता चलेगी।

तौफी नगला के बिगड़ते जा रहे है हालात
सहसवान क्षेत्र के गांव खागी नगला, तौफी नगला, वीर सहाय नगला में भी हालात खराब हैं। वहीं कादरचौक क्षेत्र में आधा दर्जन गांवों में भी पानी भर गया है। ऐसे में लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। विगत 14 जुलाई से नरौरा बैराज से गंगा में दो लाख क्यूसेक से अधिक पानी लगातार छोड़ा जा रहा है। 

इसकी वजह से अब तक 49 गांव जद में आ गए हैं। ऐसे में इन गावों की करीब 30 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। बुधवार को कछला का गेज 162.890 दर्ज किया गया। जो मंगलवार की अपेक्षा ज्यादा है। मंगलवार को यह 162.817 मीटरगेज रहा था।

बुधवार को कादरचौक क्षेत्र के लल्सी नगला, खुडवारा, तौलिया नगला समेत एक दर्जन गांवों में भी पानी भर गया। भदरौल से कछला जाने वाले रोड पर भी पानी भर गया। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

कई गांवों में बढ़ा बाढ़ का खतरा
कादरचौक क्षेत्र में गंगा में पानी बढ़ने से भदरौल-कछला रोड पर ननाखेड़ा से पपरिया गांव के पास पानी भर गया है। बाढ़ का पानी रोड क्रॉस करते हुए मढैया गांव में भर गया है। इसी तरह अगर पानी बढ़ता रहा तो करीब दो दर्जन गांवों में पानी भर जाएगा।

कादरचौक क्षेत्र के गांव लल्सी नगला, खुडवारा, तौलिया नगला, पचौरी नगला, पांडे नगला, कौवा नगला, गाढि़या, गनियाई में तीन दिन पहले ही पानी भर गया था। वहां पर लगातार पानी बढ़ रहा है। इधर बुधवार को भदरौल से कछला मार्ग पर ननाखेड़ा से पपरिया गांव के पास सड़क पर एक फुट तक पानी भर गया।
कमिश्नर ने आईजी के साथ खजुरारा पुख्ता का निरीक्षण किया
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने आईजी डॉ. राकेश कुमार सिंह के साथ बाढ़ प्रभावित गांव खजुरारा पुख्ता का निरीक्षण किया। कमिश्नर ने बाढ़ के दृष्टिगत व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने राहत चौपाल का आयोजन कर ग्रामीणों को बाढ़ से बचाव व व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली।

निर्देश दिए कि गांवों का संपर्क मार्ग बाधित न हो। उन्होंने बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि तटबंधों की विशेष निगरानी रखी जाए। एसडीएम भी अपनी-अपनी तहसीलों में बाढ़ से बचाव के लिए किए जा रहे प्रबंधों व आवश्यक व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करते रहें। उन्होंने पशुओं की देखरेख, भूसा चारे की व्यवस्था आदि के बारे में जानकारी ली। 
बुधवार को बैराजों से छोड़ा गया पानी

- नरौरा से 213749 क्यूसेक
- बिजनौर से 139743 क्यूसेक
- हरिद्वार से 140634 क्यूसेक
- गंगा के खतरे का निशान-162 मीटरगेज पर
- गंगा बह रही 162.890 मीटरगेज पर

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