बदायूं ब्यूरो चीफ - चंदन शर्मा
बदायूं। करीब दो साल पहले बालिका की दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में दोषी गुफरान को स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट) दीपक यादव ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मुजरिम गुफरान।घटना 11 अप्रैल 2021 को सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। वहां के रहने वाले एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह पत्नी और आठ वर्षीय बेटी के साथ खेत पर गेहूं की कटाई कर रहा था। उनके साथ उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के थाना बाजपुर अंतर्गत सुल्तानपुर पट्टी निवासी गुफरान पुत्र शफीक अहमद भी गेहूं की कटाई कर रहा था। इसी दौरान गुफरान उनकी बेटी को फुसलाकर गेहूं के ढेर के पीछे ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के चीखने पर गुफरान ने उसका मुंह और गला दबा दिया, जिससे मौके पर ही मृत्यु हो गई। चीख सुनकर माता-पिता के साथ ही काफी लोग वहां पहुंचे और गुफरान को पकड़कर थाने ले गए।
पुलिस ने गुफरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज ने विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी, वीरेंद्र सिंह वर्मा और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को सुना और गुफरान को फांसी की सजा सुनाई। आदेश में यह भी कहा गया है कि मुजरिम को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मौत न हो जाए।
जज बोले- जंगली हिंसक जानवर भी अपने बच्चों के साथ ऐसी दरिंदगी नहीं करते
सजा सुनाते हुए जज ने कहा- दोषी गुफरान ने पीड़िता के साथ पैशाचिक व्यवहार करते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया। दरिंदगी यही नहीं समाप्त हुई, दोषी ने पीड़िता के नाक व मुंह को दबाकर उसकी आवाज बंद करने के लिए उसका दम घोंटकर हत्या कर दी। ऐसी दरिंदगी जंगली हिंसक जानवर अपने या अन्य जानवरों के बच्चों के साथ भी नहीं करते। ऐसी घटनाएं समाज को हिलाकर रख देती हैं। जज ने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि प्रशासन और न्यायपालिका से समाज की यह आशा रहती है कि ऐसे जघन्य वर्णित अपराध को अंजाम देने वाले को कठोरतम दंड दिया जाए। इसलिए मेरी राय में मुजरिम गुफरान को मृत्युदंड दिया जाना उचित है।